लैपटॉप व प्रोजेक्टर से होगी अब छत्तीसगढ़ के स्कूलों में पढ़ाई

रायपुर। प्रदेश के सरकारी स्कूलों तक पहुंचेगी अब डिजिटल इंडिया की खनक। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) के तहत केंद्रीय मानव संसाधान विकास मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के हाई और हायर सेकंडरी के बच्चों के लिए सौगात दी है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी यानी आईसीटी योजना के तहत राज्य के हाई स्कूल में इस साल से कम्प्यूटर और प्रोजेक्टर बेस्ड पढ़ाई होगी। बता दें कि कम्प्यूटर के साथ-साथ बच्चों के लिए इंटरनेट की सुविधा भी दी जाएगी।वहीं इसके लिए पहले चरण में 1246 स्कूलों को स्मार्ट क्लासेस में बदला जाएगा। इन सरकारी स्कूलों में लैपटॉप और प्रोजेक्टर के जरिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के बच्चों को पढ़ाया जाएगा। आपको बता दें कि प्रदेश में 4 हजार 363 हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में यह अभियान चलाया जाएगा। ज्ञात हो कि इसके पहले 653 स्कूलों में पहले से ही कम्प्यूटर से पढ़ाने की योजना चल रही थी। अब आईसीटी योजना का विस्तार हर स्कूल तक किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को 246 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिया है। आपको बता दें कि आईसीटी योजना की शुरुआत केंद्र ने 2004 में की थी। इसका मकसद था बच्चों को इंटरनेट और कम्प्यूटर का ज्ञान दिया जाना। इसके पहले भी केंद्र सरकार के फंड से कुछ स्कूलों में कम्प्यूटर की पढ़ाई के लिए फंड आया था। बाद में कुछ स्कूलों में यह योजना खटाई में पड़ गई। कई जगहों पर बिजली की व्यवस्था नहीं होने से कम्प्यूटर को धूल खाता रहा। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत 20 लैपटॉप, 4 डेस्ट टॉप और चार प्रोजेक्टर लगेंगे। कुल 246 करोड़ का बजट प्रस्तावित है । इस योजना से बच्चे अब कम्प्यूटर की बारीकियों को तो समझेंगे ही, इंटरनेट के जरिए पढ़ाई के लिए ऑडियो और वीडियो पठन-पाठन सामग्री का इस्तेमाल कर सकेंगे। मगर आईसीटी योजना फिलहाल प्रदेश के सुदूर अंचलों में स्थित स्कूलों में चलाना मुश्किल होगा। इन इलाकों में इंटरनेट की कनेक्टिविटी और बिजली की बेहतर व्यवस्था नहीं होने योजना को क्रियान्वित करने में परेशानी होगी।

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